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टेक्नोलोजी

[2019] टॉप 5 4G Mobile अंडर Rs 10000

[2019] टॉप 5 4G Mobile अंडर Rs 10000

(1) Redmi Y2 (Gold, 3GB RAM, 32GB Storage)ज्यादा डिटेल्स के लिए इमेज/फोटो पर क्लिक करेंRedmi Y2 में 5.99 (15.2cm(5.99) Large Display) इंच की डिस्प्ले दिया गया है और इस मोबाईल मे  रेज़ोल्यूशन 720 x 1440 पिक्सल वाली डिस्प्ले है। इसके के आलावा वाइस क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 625 चिपसेट है जिसकी मदद से Mobile की स्पीड तेज है, Redmi Y2 में 3080mAh की बैटरी दिया गया है, सबसे अच्छा स्मार्टफोन 2019 मे mi मोबाइल फोन Redmi Y2 है। नाम: Redmi Y2 रैम : 3 GB स्टोरेज: 32 GB स्क्रीन आकार (इंच) : 15.2cm(5.99) Large Display स्क्रीन रेजोल्यूशन (पिक्सेल): 1440 x 720 pixels प्रोसेसर: 2 GHz, Octa ऑपरेटिंग सिस्टम: Android 8.1 डिस्प्ले टेक्नोलॉजी: FHD Plus रियर कैमरा: Dual 12MP+5MP फ्रंट कैमरा: 16MP बैटरी : 3080mAh कीमत: 9,999.embed-container { position: relative; padding-
अपने बच्चो कों Mobile न दें ! – जानिए क्यों Mobile बच्चो के लिए है हानिकारक। Harmful effects of Mobile Radiation for children Hindi

अपने बच्चो कों Mobile न दें ! – जानिए क्यों Mobile बच्चो के लिए है हानिकारक। Harmful effects of Mobile Radiation for children Hindi

mobile radiation:- आजकल लोग अपने बच्चों को Mobile फोन देने में संकोच नहीं करते। बच्चे लगभग एक साल की उम्र से ही Mobile Phone की जिद करने लगते है। Mobile Phone में  गेम खेलना, वीडियो देखना आदि बच्चों को बहुत पसंद होता है। लेकिन Mobile Phone का बच्चो पर बुरा असर पड़ सकता है। वर्तमान के बच्चे Radio-Frequency (रेडियो फ्रीक्वेंसी ) वाले वातावरण में बडे हो रहे हैं। मोबाइल फोन में भी रेडियो फ्रीक्वेंसी का उपयोग होता है, जो की नॉन आयोंनाईज़ रेडिएशन- mobile radiation का एक रूप ही है। मोबाइल फोन बच्चों के लिए शारीरिक और मानसिक समस्याएं पैदा कर सकता है।➣ Mobile Radiation से स्वास्थ्य संबंधित खतरें:पिछले कुछ सालों से यह सिर्फ मात्र एक अनुमान था कि मोबाइल फोन हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। द जर्नल ऑफ़ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के अध्ययन में पाया गया था कि मोबाइल फोन मस्तिष्क प्रणाली पर प्रतिक्रिया
चीन ने प्रयोगशाला में बंदर का क्लोन तैयार किया ! तो क्या इंसानों को भी लेब में बनाया जा सकेगा ?

चीन ने प्रयोगशाला में बंदर का क्लोन तैयार किया ! तो क्या इंसानों को भी लेब में बनाया जा सकेगा ?

 कुछ सप्ताह पहले चीन के शांघाई में स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्यूरोसाइंस ऑफ़ चाइनीज़ एकेडेमी ऑफ़ साइन्स में हाल ही में दो आनुवंशिक रूप से समान लंबी-पूंछ वाले मकाक बंदरो ने जन्म लिया। शोधकर्ताओं ने नवजात बन्दर के नाम झोंग झोंग और हुआ हुआ रखे है जों कि क्रमशः छह और आठ सप्ताह पहले प्रयोगशाला में पैदा हुए। इस शोध के बारेमे दुनियाभर के वैज्ञानिकों की अलग-अलग राये है, कुछ् वैज्ञानिकों का केहना है की इस शोध से भविष्य में इंसानों की क्लोनिंग का खतरा है और कुछ् वैज्ञानिकों का केहना है की इस शोध से दवाईया के जांच के लीये आनुवंशिक रूप से समान जानवर मिल पाएंगे और जंगलो से जानवरों को नही लाना पड़ेगा । ➽ किस तकनीक से और कैसे बनाएं गये बंदर के क्लोन ?इस शोध की अगवाई ४५ सालके सन क्वांग कर रहे है, जोकि उस संस्था के डिरेक्टर है। इस बंदरो की क्लोनिंग में उसी तकनीक का उपयोग हुआ है जिससे 20 साल पहले सन
इसरो (ISRO) ने लोन्च किये इन्डिया के १००वे सेटेलाइट के साथ ३१ सेटेलाइट

इसरो (ISRO) ने लोन्च किये इन्डिया के १००वे सेटेलाइट के साथ ३१ सेटेलाइट

इसरो (ISRO)इसरो:- शुक्रवार तारीख १२ जनवरी २०१८ को सुबह ९:२९ बजे भारत की अवकाश संस्था ISRO (Indian Space Research Organisation) ने श्रीहरिकोटा आंध्रप्रदेश से एकसाथ ३१ सेटेलाइट लोन्च किये, जिसमे इंडिया का १००वाँ सेटेलाइट भी शामिल था । असफल लोंचिंग के ४ महीने बाद इसरो ने PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) से इन सेटेलाइट्स को सफलतापूर्वक पृथ्वी की ऑर्बिट में स्थापित कीये ।» ना केवल भारत के बल्कि दुसरे देशो के भी सेटेलाइट्स किये लोन्चइस लोंचिंग में भारत के अलावा कनाडा, फ्रान्स, फ़िनलैंड, इंग्लैंड, कोरिया और अमेरिका के कुल मिलाके २८ नेनो सेटेलाइट्स अंतरीक्ष में प्रस्थापित किये गए । और भारत के Cartosat-2 Series, Microsat और एक नेनो सेटेलाइट सहित ३ सेटेलाइट्स अंतरीक्ष में प्रस्थापित किये गए ।» क्या खास बात थी इस लोंचिंग में ? एक ही रोकेट से दो अलग अलग ऑर्बिट में