Saturday, January 19Important Information

चीन ने प्रयोगशाला में बंदर का क्लोन तैयार किया ! तो क्या इंसानों को भी लेब में बनाया जा सकेगा ?

 

कुछ सप्ताह पहले चीन के शांघाई में स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्यूरोसाइंस ऑफ़ चाइनीज़ एकेडेमी ऑफ़ साइन्स में हाल ही में दो आनुवंशिक रूप से समान लंबी-पूंछ वाले मकाक बंदरो ने जन्म लिया। शोधकर्ताओं ने नवजात बन्दर के नाम झोंग झोंग और हुआ हुआ रखे है जों कि क्रमशः छह और आठ सप्ताह पहले प्रयोगशाला में पैदा हुए। इस शोध के बारेमे दुनियाभर के वैज्ञानिकों की अलग-अलग राये है, कुछ् वैज्ञानिकों का केहना है की इस शोध से भविष्य में इंसानों की क्लोनिंग का खतरा है और कुछ् वैज्ञानिकों का केहना है की इस शोध से दवाईया के जांच के लीये आनुवंशिक रूप से समान जानवर मिल पाएंगे और जंगलो से जानवरों को नही लाना पड़ेगा ।

 ➽ किस तकनीक से और कैसे बनाएं गये बंदर के क्लोन ?

इस शोध की अगवाई ४५ सालके सन क्वांग कर रहे है, जोकि उस संस्था के डिरेक्टर है। इस बंदरो की क्लोनिंग में उसी तकनीक का उपयोग हुआ है जिससे 20 साल पहले सन 1996 में डॉली नामकी भेड़ को बनाया गया था। झोंग झोंग और हुआ हुआ सोमेटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांस्फर – SCNT (दैहिक कोशिका परमाणु हस्तांतरण) नामकी तकनीक से बनाए गए । डॉली (भेड़) की क्लोनिंग के बाद चूहे, सुअर, बिल्ली हिरण, कुत्तों और घोड़े जेसे २२ स्तनधारी प्राणियों की क्लोनिंग संभव हो गई थी लेकिन गैर-मानव प्राइमेट्स का क्लोनिंग एक चेलेंज था।

 

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इस तकनीक जेसी ही दूसरी तकनीक एम्ब्रो स्प्लित्टिंग (भ्रूण विभाजन) से सन 1999 में रीसस बंदरों की क्लोनिंग की थी, लेकिन उस तकनीक से सिर्फ ४ क्लोन ही बन पाते थे । लेकिन SCNT से अनलिमिटेड क्लोन बनाए जा सकते है । फिर भी इस तकनीक में सफलता की संभावना बड़ी कम है, ६० से ज्यादा सरोगेट मधर में से सिर्फ दो बच्चे ही हेल्धी रूप से जन्म ले सके और दो बच्चे जन्म लेने के तुरंत बाद मर गए ।

Also Read:  7 Health Tips in Hindi | हेल्थ टिप्स हिंदी में

 ➽ क्या इस शोध से इंसानों की भी क्लोंनिंग हो सकती है ?

इंसानों से कुछ हद तक समान प्राइमेट्स प्राणियों की क्लोनिंग से यह सवाल पैदा हुआ है कि क्या इस तकनीक से इंसानों की भी क्लोंनिंग कि जा सकेगी । बोटसन चिल्ड्रेन होस्पिटल के स्टेम सेल प्रोग्राम के डिरेक्टर डॉ. लियोनार्ड ज़ोनने कहाकि “ यह पहलीबार किसी प्राइमेट्स प्राणियों की क्लोनिंग हुई है, हम इंसानों की क्लोनिंग करने के पहले से ज्यादा करीब है । यह सवाल पैदा हुआ है की हमे किस दिशा में जाना है ” ।

इस शोध के सहायक वैज्ञानिक मुमिंग पू ने कहा की “इन्सान भी प्राइमेट्स है, तो फिर इंसानों समेत प्राइमेट्स प्राणियों की क्लोनिंग के लीये तकनिकी बाधाऐ अब खत्म हो चुकी है । हम इस तकनीक का उपयोग हमारी सेह्द के लीये उपयोगी दवाईया की जांच के हेतु लेना चाहते है , हमारा इंसानों की क्लोनिंग का कोई इरादा नही है “।

इस तकनीक का सफलातादर बहुत कम होने के कारन कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक से इंसानों की क्लोनिंग नही हो सकती ।

Find this Article helpful then Share With Your Friends

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

8 + twelve =