Poems & Story

Kavita in Hindi On Life 2019 | Hindi Poem बेहतरीन कविताएं

Kavita in Hindi On Life: कई लोगो को कविताएँ पढनें का शोख़ होता है, लेकिन सब जगहों पे तो बुक नहीं लेजा सकते, इस लिए हम उन फ्रेंडस के लिए यशु जान के द्वारा लिखी गई कुछ खास कविताएँ –Kavita in Hindi (Hindi Poem) लाये है जो आप कही से भी आपने मोबाईल के जरिये पढ़ सकते है, और आपने दोस्तों के साथ खास कविताएँKavita in Hindi (Poem in Hindi) Share ज़रूर करें।

कविताएं – Kavita in Hindi (Hindi Poem)

अंधाधुन लुटाया है

लोगों ने फ़िर से विश्वास,
उन्हीं पे दिखलाया है,
जिनकी करतूतों ने देश को ,
अंधाधुन लुटाया है,
मैं यूं ही नहीं बोल रहा,
हाथ सबूत कोई आया है,
जिनकी करतूतों ने देश को ,
अंधाधुन लुटाया है।

काला हो या गोरा धन,
ये तो बैठ गए अब बन,
पांच साल के लिए तमाशा,
देखेंगे अब सारे हम,
क्यूंकि हमीं ने ही इनको,
भारी मत से जिताया है ,
जिनकी करतूतों ने देश को ,
अंधाधुन लुटाया है।

ऐसी – ऐसी बातें यार,
मुझे बताती ख़ुद सरकार,
बोलती है सबके आगे,
सुनना पड़ता बार – बार,
कई बार तो आकर मेरे,
कानों में बतलाया है ,
जिनकी करतूतों ने देश को ,
अंधाधुन लुटाया है।

जो भी होगा देखेंगे हम,
फिर से बाँटेंगे सुख गम,
मैं तो सच्चाई ही लिखूंगा ,
रोक ले जिसमें होगा दम,
यशु जान को चक्कर इनका,
आज समझ में आया है ,
जिनकी करतूतों ने देश को ,
अंधाधुन लुटाया है।

poems reading online, Kavita in Hindi

अंधी , गूंगी , बहरी सरकार

भगत सिंह के जैसी क्रान्ति लानी पड़ेगी फ़िर से ,
अंधी , गूंगी , बहरी सरकार जगानी पड़ेगी फ़िर से।

आज़ादी के बाद किसी को डर ही नहीं रहा ,
चोरों , ठगों को तो इस कदर ही नहीं रहा ,
कि कर गुनाह जेल की हवा खानी पड़ेगी फिर से ,
अंधी , गूंगी , बहरी सरकार जगानी पड़ेगी फ़िर से।

नोट – नोट कर सफ़ेद पैसा काला दिया बना ,
बूंद – बूंद कर पाप का घड़ा भरने का डर ना ,
विदेशों की सरकार भी हिलानी पड़ेगी फ़िर से ,
अंधी , गूंगी , बहरी सरकार जगानी पड़ेगी फ़िर से।

शहीदों के शहीदी दिवस पर फ़ूल चढ़ाते हैं,
हाथ जोड़ और टेक के माथा भूल ही जाते हैं,
जो कसम सामने खाई है निभानी पड़ेगी फिर से,
अंधी , गूंगी , बहरी सरकार जगानी पड़ेगी फ़िर से।

यशु जान इस बात का कोई असर नहीं होना,
जनता को बहुमत देकर भी मतहीन पड़ा होना।

आ भगत सिंह को समस्या ये सुलझानी पड़ेगी फिर से,
अंधी , गूंगी , बहरी सरकार जगानी पड़ेगी फ़िर से।

Kavita in Hindi (Hindi Poem)

उनके नाम दो हैं रिश्ता एक है

एक का दिल पत्थर एक का नेक है,
प्यार में लड़ाई लाज़मी है होनी,
उबलते गुस्से से फ़िर निकलता सेक है,
नाम के विपरीत हैं दोनों,
करते बात हैं बड़े अदबों की,
एक यश , कीर्ति को ढूंढे,
दूसरा चाहे मिठास लफ़्ज़ों की,
उनके नाम दो हैं रिश्ता एक है।
रूठ जाते हैं , मान जाते हैं,
लड़ते समय भूल पहचान जाते हैं,
गुस्सा ठंडा हो तो तब याद आता,
हम एक दुसरे पर ईमान लाते हैं,
आँखें बंद कर पहचान लेते,
आहट एक – दुसरे के क़दमों की,
एक यश , कीर्ति को ढूंढे,
दूसरा चाहे मिठास लफ़्ज़ों की,
उनके नाम दो हैं रिश्ता एक है।
इश्क़ में कोई , ज़ात – पात ना,
अलग होने की अब करते बात ना,
समझ है उनको साफ़ दिल वालों के,
ढूंढने से भी मिलते हैं साथ ना,
बात अलग ही होती यशु जान,
इन इश्क़ के पाकीज़ा नग़्मों की,
नाम के विपरीत हैं दोनों,
करते बात हैं बड़े अदबों की,
एक यश , कीर्ति को ढूंढे,
दूसरा चाहे मिठास लफ़्ज़ों की,
उनके नाम दो हैं रिश्ता एक है।

अरबों डालर का करज़ाई

इस तरह तो तरक्की करेगा सिर्फ़ कलेश,
अरबों डालर का करज़ाई भारत देश,
फिर फिरंगी भारत में कर रहे प्रवेश,
इस तरह तो तरक्की करेगा सिर्फ़ कलेश।

कैसे ऊपर उठेगी फ़िर हमारी करंसी,
जब तक बंद ना होगी कर्ज़े की एजेंसी,
ऐसे तो सदियों तक ना चलनी है पेश,
इस तरह तो तरक्की करेगा सिर्फ़ कलेश
अरबों डालर का करज़ाई भारत देश।

बातों का ये खेल नहीं करना ही पड़ना,
वरना पड़ सकता है गुलामी में फिर सड़ना,
अपनी इज्ज़त अपने हाथ ना इसको बेच,
इस तरह तो तरक्की करेगा सिर्फ़ कलेश,
अरबों डालर का करज़ाई भारत देश।

एक और एक दो होते कभी ना होते ग्यारह,
एक और दो भी कभी ना होंगे मिलके बारह,

यशु जान तूने क्या लेना तू अपना देख,
इस तरह तो तरक्की करेगा सिर्फ़ कलेश,
अरबों डालर का करज़ाई भारत देश।

आज देख रहा हूँ लोगों को वोट डालते हुए

आज देख रहा हूँ लोगों को वोट डालते हुए,
अपनी – अपनी ज़िम्मेदारी को संभालते हुए।

मगर एक बात तो हमें पता होगी,
मतदान कोई खेल नहीं,
यही समझा रहा था सबको,
लोग मुझे ताक रहे थे,
और बोल रहे थे,
कि मैं किस पक्ष का हूँ,
मैंने जवाब देते हुए कहा,
इंसान हूँ इंसानियन के लक्ष्य से हूँ,
मतदान करने से पहले सोचना ज़रूर,
कि आपका एक मतदान,
हो सकता है सबके लिए वरदान,
और ले भी सकता है हम सबकी जान।

पांच साल के लिए,
किसी को अपने ऊपर,
राज करने दे रहे हो,

बदले में चाहे कुछ ना ले रहे हो,
ये छोटी सी बात नहीं है,
और कोई मज़ाक भी नहीं है,
जो आप हस रहे हो,
आज आप हस रहे हो,
कल भ्रष्टाचारी नेता आप पे हसेंगे,
यशु जान फिर पांच साल दिक्कत से कटेंगे।

एक देश है मौतपुर – Kavita in Hindi

एक देश है मौतपुर,
वहाँ हवाई जहाज़ नहीं जाता,
कोई वहाँ अपनी मर्ज़ी से ना जाता,
नागरिकता उस देश की हर कोई है पाता,
एक देश है मौतपुर।

वहाँ किसी को काम करना होता नहीं ज़रूरी,
पैर फैलाकर सोना पड़ता सबकी ये मजबूरी,
ना हो पैसा ना कोई डर खुलवाना पड़े ना खाता,
कोई वहाँ अपनी मर्ज़ी से ना जाता,
एक देश है मौतपुर।

कभी नहीं उस देश में शादी किसी की होती,
उस देश में जनता अपने कपड़े भी ना धोती,
पहुँच वहाँ पर सुख मिले ना हर कोई पछताता,
कोई वहाँ अपनी मर्ज़ी से ना जाता,
एक देश है मौतपुर।

कोई उठ ना सकता है एक बार वहाँ सोकर,

भूले से भी गुज़रे ना कोई भी वहाँ से होकर,
छोड़ के हर अपना पराया घर को लौट है जाता,
कोई वहाँ अपनी मर्ज़ी से ना जाता,
एक देश है मौतपुर।

उस देश का नियम है मुड़कर वापिस ना जाना,
और किसी ने आना हो तो मुश्किल है मुड़ पाना,
सोच – सोच इस बारे में है यशु जान घबराता,
कोई वहाँ अपनी मर्ज़ी से ना जाता,
एक देश है मौतपुर।

Kavita in Hindi (Hindi Poem)

एक हज़ार गाय मारी जाती है

चमड़ा पाने के लिए चमड़ी उखाड़ी जाती है,
इसके चक्कर में एक हज़ार गाय मारी जाती है।

एक अलग किस्म का चमड़ा भारत,
अमरीका को पहुँचाता है,
उसके लिए गर्भवती गाय को,
ज़िन्दा ही मारा जाता है,
फ़िर गर्भ से बच्चा निकाल के,
चमड़ी उतारी जाती है,
पहले उसकी देह खौलते,
पानी में उबाली जाती है,
इसके चक्कर में एक हज़ार गाय मारी जाती है।

कितने वो निर्दय हैं जो इनको,
कई दिन भूखा रखते हैं,
उबला पानी मुँह पे डाल,
टुकड़े – टुकड़े करते हैं,
ऐसे ही मारी जाती है,

जो अपना दूध पिलाती है,
उनके अंदर की दरिंदगी,
तरस ज़रा ना खाती है,
इसके चक्कर में एक हज़ार गाय मारी जाती है।

ये धंधा बंद नहीं हो सकता,
ये दर्द बड़ा दुखदाई है,
बुरे कामों की सरकारों को,
अंधा – धुन कमाई है,
जो यशु प्राण की दाती है,
ना अपना दर्द बताती है,
जिसकी हो ना माँ भैया,
ये माँ का फ़र्ज़ निभाती है,
इसके चक्कर में एक हज़ार गाय मारी जाती है।

इसके गोबर से खाद बने,
और लेप से मरते कीटाणु,
ये देवी है कोई पशु नहीं,
सुन यशु जान मैं जानूँ,
ना मरते हुए घबराती है,
बस आँखों में बस जाती है,

इस देश कमाई की ख़ातिर,
माँ अपनी बलि चढ़ाती है,
इसके चक्कर में एक हज़ार गाय मारी जाती है।

हमें जिसको आज बचाना है,
वो भारत माँ गौ माता है,
मेरे साथ चलो मेरे भाइयों,
ये कवि आज बताता है,
क्या तुम्हें नजर ना आती है,
जो पहले दुध पिलाती है,
फ़िर अपना खून बहाती है,
जो अभी तलक भी पिघली ना,
तेरी पत्थर की ही छाती है,
इसके चक्कर में एक हज़ार गाय मारी जाती है।

कई दिनों से सोच रहा हूँ Kavita in Hindi

कई दिनों से सोच रहा हूँ,
सोचके आँसू पोच रहा हूँ,
क्या इतना हूँ कमज़ोर मैं,
हाथ जोड़ उन्हें रोक रहा हूँ।

नशा इस तरह बिक रहा है देश में,
कि हर दिन गुज़र रहा है क्लेश में,
कैसे निज़ात पा सकेंगे हम इस रोग से,
मैं बताने जा रहा हूँ इस संदेश में।

आता है कहाँ से कैसे है आता,
लगता है कोई अपना ही बिक जाता,
साजिश है उनकी जो सफ़ेद कपड़े वाले,
अपने जुर्म को हैं कुर्सी के नीचे संभाले,
कभी उनके बच्चे भी आएंगे,
इसकी लपेट में,
मैं बताने जा रहा हूँ इस संदेश में।

सरकार की कमाई है करोड़ों शराब से,
फ़िर कैसे मिटाएं वो इसको पंजाब से,
मैं बात तो कर रहा हूँ सारे ही देश की,
जो असली है समझा उस नकली वेश की,
इनका साथ मत दो,
तुम इनके फरेब में,
मैं बताने जा रहा हूँ इस संदेश में।

इस देश में पैसा है विदेशों से ज़्यादा,
जो सरकार कर लेती है आधा – आधा,
और जनता को मिलते हैं झूठे दिलासे,
या भाषण की बोली के मीठे बतासे,
यशु जान फसी जनता,
ठगों के आदेश में,
मैं बताने जा रहा हूँ इस संदेश में।

कोई ऐसा साथी चाहिए जो मेरे हक में हो

मुझे कोई ऐसा साथी चाहिए जो मेरे हक में हो,
तूने कहा वही मिलता है जो अपनी किस्मत में हो।

मांग रहे हो तुम जिससे धमकियाँ देकर,
क्या पता वो देने वाला कैसी हालत में हो।

वो दे रहा है धोखा तेरे मन में बैठ गया,
हो सकता है उधर भी वो इसी शक में हो।

बुरा बना दिया तूने उसे इंसान ना समझ,
शायद चालाकियां करना उसकी आदत में हो।

समझ कर देख तो सही यशु उसके हालातों को,
हो सकता है वो दीवानी ही तेरी मुहब्बत में हो।

क्लियोपेट्रा राजनीति में उसके जैसा और कोई ना

जिसने राजनीति से जीत लिया मिस्र की बादशाही को,
रूप, रंग, और नयन नक्श में मात दी थी खुदाई को,
क्लियोपेट्रा नाम था उसका,
हर एक किस्सा उसका जग जाहिर था,
राजनीति में उसके जैसा और कोई ना माहिर था।

जनता को कोई कष्ट ना पहुँचे,
हर घर प्यार मिले रोटी,
पूरे विश्व पे राज करती,
आज अगर ज़िन्दा होती,
अपने पिता की मृत्यु के बाद,
उसे राज्य सम्भालना आख़िर था,
राजनीति में उसके जैसा और कोई ना माहिर था।

राज्य हाथ आने पर उसके,
शत्रु भी पैदा होने लगे,
कुछ ऐसा करें कि जनता,
रानी का विश्वास खोने लगे,
उसकी जड़ें उखाड़ने वाला,

उसके ही राज्य का काफ़िर था,
राजनीति में उसके जैसा और कोई ना माहिर था।

राज्य छिन जाने पर उसने,
लड़ी थी ख़ूब लड़ाई,
अपनी बुद्धि से राज की डोर,
वापिस थी हाथ में पाई,
उसको मारने की फ़िराक़ में,
बैठा हुआ उसका क़ातिल था,
राजनीति में उसके जैसा और कोई ना माहिर था।

ग़लत दिशा में जोर Kavita in Hindi

एक व्यक्ति को रोज़,
एक जैसा सपना आता था,
सपने में वो व्यक्ति,
भागता ही जाता था,
जहाँ रास्ता ख़त्म होता था,
वहाँ एक बंद दरवाज़ा था,
वो आगे को ज़ोर लगाता,
पर उसे खोल ना पाता था,
और वक़्त अगली रात,
वही सपना फ़िर दोहराता था,
और उसमें वो भागता ही जाता था।

सुबह उसने फ़ोन लगाया,
मनोरोग चिकित्सक को बुलाया,
सपने में जो भी था होता,
सारा किस्सा उसे समझाया,
बातचीत सब सुनके उसकी,
उसके दिल में आई खुश्की,
कहा तुझे जब सपना आए,

सपने में तू भागता जाए,
आख़िर में बंद दरवाज़ा आए,
तू उसे धकेले ज़ोर लगाए,
फ़िर भी दरवाज़ा खुल ना पाए।

अबकि बार तू ऐसा करना,
आख़िर में कुछ देर ठहरना,
दिमाग़ को करके अपने ताज़ा,
ग़ौर से देखना वो दरवाज़ा,
बन जाएगा अच्छा योग,
बुद्धि का अब कर प्रयोग,
ख़तम हों जब दिन में तारे,
बताना फ़िर क्या हुआ प्यारे,
हल मिलेगा वहीं पे जाकर,
शक्ति बुद्धि प्रयोग में लाकर,
सो जाना तुम खाना खाकर।

रात सोया कर दृढ़ इरादा,
सपने में फिरता भागा – भागा,
देखा जाएगा जो भी होगा,
दरवाज़ा देख कदमों को रोका,

क्या इस दरवाजे मैं ऐसा,
उसने उसको गौर से देखा,
चमकते कुछ लफ़्ज़ दिखे थे,
जो दरवाज़े पर ही लिखे थे,
खोलना है तो मत धकेलो,
पीछे खींचो सब कुछ लेलो,
ग़लत दिशा में जोर लगाता,
तभी ना दरवाज़ा खुल पाता,
जैसे खींचा पीछे को,
उसने बुद्धिमानी से,
मिला ख़ज़ाना कुदरत का,
दरवाज़ा खुला असानी से।

यशु जान वो बन्दा,
सफल कभी ना हो पाता,
अपनी कर मनमानी जो,
ग़लत दिशा में जोर लगाता।

Famous Hindi Poems Kavita in Hindi

चुनावी जंग ले डूबेगी ख़बरदार हो जा

चुनावी जंग ले डूबेगी ख़बरदार हो जा,
आने वाले समय के लिए तैयार हो जा।

प्रश्नों में ही तुझे उत्तर ढूँढने आ जाएँ,
बुद्धि की दृष्टि से भी समझदार हो जा।

चाहे ही कुछ खोना पड़े इसके लिए,
दान – पुन्न कर पहले ही दिलदार हो जा।

तेरे आगे बोल सके ना कोई करिन्दा,
बोलने में भी इतना तू असरदार हो जा।

पापी ढोंगी तुझसे डरके माफ़ी मांगें,
ऐसा नायक बन ऐसा किरदार हो जा।

यशु जान तेरे ज्ञान ध्यान को जंग लगे ना,
कर अपनी ख़ुद सुरक्षा और अंगार हो जा।

देशवासियों मैं पाश बोल रहा हूँ Kavita in Hindi

देशवासियों मैं पाश बोल रहा हूँ,
लेकर एक आस बोल रहा हूँ,
भूल गए मेरे लफ़्ज़ों को,
मेरी कविता के शब्दों को,
स्थिति बिगड़ है रही सम्भालो,
अपना एक ही लक्ष्य बनालो,
मैं शिक्षा देकर जो गया,
उसका ना पालन कभी हुआ ,
मैं होकर बड़ा निराश बोल रहा हूँ,
देशवासियों मैं पाश बोल रहा हूँ।

जैसा था पहले वैसा हूँ,
कड़वी बातें कहता हूँ,
मरा नहीं मैं हूँ ज़िंदा,
किसी के अंदर बैठा हूँ,
मेरी आत्मा प्यासी है,
कोई हुआ वनवासी है,
देश में गद्दारी की सज़ा,
सिर्फ़ फांसी और फांसी है,

तुम लोग अभी भी भ्रम में हो,
सब घिरे एक जंगल में हो,
पूरा करके विश्वाश बोल रहा हूँ,
देशवासियों मैं पाश बोल रहा हूँ।

मैं लोहा छोड़ गया था,
और जो मजबूत बड़ा था,
सोना बनके कमज़ोर हुआ,
किसी गले में लटक रहा था,
अब जागो सोना मत,
बहुत हो गया बस,
इन नेताओं के जाल में,
फिर से जाना मत फस,
कोई ना तुम्हें जगाएगा,
सोते हुए मार मिटाएगा,
खड़ा हो यशु जान के पास बोल रहा हूँ,
देशवासियों मैं पाश बोल रहा हूँ।

नाम ख़ुदा का किसी ने लेना क्या यारों

नाम ख़ुदा का किसी ने लेना क्या यारों,
बन्दगी करने वालों को कहते गोली मारो,
उस परवरदिगार का बन्दा चाहता है उसे डराना,
हक़ की भूल के गया है सीख हराम का खाना,
आख़िर में चित हो जाएंगे खाने चारों,
बन्दगी करने वालों को कहते गोली मारो।

मैंने सुना है अब जलता है देख पड़ोसी की तरक्की,
उसको कैसे इतना मिला फ़िर सोच हो गई शक्की,
और ख़ुदा को ताने कसता है लाख हज़ारों,
बन्दगी करने वालों को कहते हैं गोली मारो,
नाम ख़ुदा का किसी ने लेना क्या यारों।

कोई कैसे लग गया नौकरी इस पर भी उसके चर्चे,
वो ख़ुश है मस्ती में और मैं झेल रहा क्यों ख़र्चे,
फ़िर चिल्लाता है डूब के मर जाओ रिश्तेदारों,
बन्दगी करने वालों को कहते हैं गोली मारो,
नाम ख़ुदा का किसी ने लेना क्या यारों।

ना ख़ून सफ़ेद हुआ है ना रही है रंग में लाली,
सारी उम्र छुपाता फिरता है अपनी करतूतें काली,
यशु जान क्या इसका होगा सोचो विचारो,
बन्दगी करने वालों को कहते हैं गोली मारो,
नाम ख़ुदा का किसी ने लेना क्या यारों।

Short Hindi Poems

मुझे हुनर दिखाने का एक मौका देदो

मुझे हुनर दिखाने का एक मौका देदो,
दुनियां को बताने का एक मौका देदो।

काबिल हूँ मैं जहान को जीतने के लिए,
तुम सामने तो आने का एक मौका देदो।

अरमान उछल रहे हैं समंदरी लहरों की तरह,
सिर्फ़ ख़ुद को आज़माने का एक मौका देदो।

नौजवानों की जवानी नशे में ना फसेगी,
उन्हें कुछ कर दिखाने का एक मौका देदो।

कुछ और ना सही इतना तो करदो तुम,
हमें मौका ही बनाने का एक मौका देदो।

वो इंसानों का नहीं मुर्दों का शहर है

जहाँ आम जनता पर होता,
ज़ालिमों का कहर है,
कोई आवाज़ ना उठाता,
ना ही चलती लहर है,
वो इंसानों का नहीं बल्कि,
मुर्दों का शहर है।

जहाँ लोग गरीबी में रहते,
अत्याचारों की सीमा ना,
और लूट मार का कारोबार,
ख़ूब चले हो धीमा ना,
डंक है इनका फ़िर भी तेज़,
चाहे ना अंदर ज़हर है,
जहाँ आम जनता पर होता,
ज़ालिमों का कहर है।

होती पूजा शैतान की है,
देवता और ना इन्हें मिला,

कुचला ही वो जाता है,
जो हो आंगन में फूल खिला,
ये उनकी दृन्दगी का,
दूसरा तीसरा पहर है ,
जहाँ आम जनता पर होता,
ज़ालिमों का कहर है।

बलात्कारों का सिलसिला,
अभी तक ना थमा ही है ,
लोगों की साँसे बंद कर,
ये एक तरह का दमा ही है,
सब का पानी दूषित हुआ,
नदी है या नहर है,
जहाँ आम जनता पर होता,
ज़ालिमों का कहर है।

ज़माना ही कातिल सा हो गया है

आज के ज़माने में जीना भी मुश्किल हो गया है,
मुश्किल तो होना था ज़माना ही क़ातिल सा हो गया है।

ज़िन्दगी में मुश्किलों के सिवा कुछ और ना रहा,
मेरे लिए मर जाना ही अब मंज़िल सा हो गया है।

आदमी – आदमी का दुश्मन दुश्मन की क्या बताऊं,
दुश्मनी के नशे में वो तो अब पागल सा होगया है।

सरकारें खेल रहीं हैं लुका छुपी मासूमों के साथ,
ख़ुदा भी मुझको लगे अब जैसे बेदिल सा होगया है।

ताक़तवर भी अब मदद नहीं करता कमज़ोरों की,
क्या हुआ है क्यूं तू यारा बुज़दिल सा हो गया है।

यशु को ख़ुश होते हुए देखना चाहता नहीं ज़माना,
गमों में उठना बैठना तो महफ़िल सा हो गया है।

क्या लिख सकता हूँ तेरी सोच से परे है

मेरे इरादों के पौधे अभी तक हरे हैं,
मेरे दिल में देश के प्रति अरमान भरे हैं,
कहना है मुश्किल मेरी कविता से कई,
आतंकवादी ही नहीं नेता भी डरे हैं,
मैं क्या – क्या लिख सकता हूँ,
और क्या कुछ नहीं,
तेरी पहुँच से परे है,
तेरी सोच से परे है।

सत्ता में कोई हो,
कमाकर है खाना,
सरकारें बदलती ही रहती हैं यारो,
मेहनत ही करनी,
है मेहनत ख़ज़ाना,
तकदीर बदलती है इससे प्यारों,
क्यों लगता रहा है संसद में तमाशा,
हमले में तो रिश्ते हमारे मरे हैं,

मैं क्या क्या लिख सकता हूँ,
और क्या कुछ नहीं,
तेरी पहुँच से परे है,
तेरी सोच से परे है।

गरीबों की जवानी,
ग़रीबी में गुज़री,
कर डाली इसी ने किसानों की हत्या,
ये बेरोजगारी,
अजीब बीमारी,
बनी हुई है एक गम्भीर समस्या,
जो कुर्सी पे बैठे ज़वाब हैं देते,
पता है वो कितने खोटे खरे हैं,
मैं क्या – क्या लिख सकता हूँ,
और क्या कुछ नहीं,
तेरी पहुँच से परे है,
तेरी सोच से परे है।

सरकार ठगेगी,
पर अच्छी लगेगी,
लोगों के पास और कोई चारा नहीं,

घर का ही मुखिया,
कुछ झोल करे है,
लूटना देश को चौकीदारा नहीं,
कोई छत ना मकान गरीबों के सिर पे,
ख़ुद बताएँ यशु जान हम कितना लड़े हैं,
मैं क्या – क्या लिख सकता हूँ,
और क्या कुछ नहीं,
तेरी पहुँच से परे है,
तेरी सोच से परे है।

Kavita in Hindi Mein

सच्चे कवि का यही एक धर्म Kavita in Hindi

कला का फ़ायदा बहुत ही होता,
जिससे जागे हर कोई सोता,
अपना हुनर दुनियां को दिखाना,
सच्चे कवि का यही एक धर्म है,
समाज के विशेष मुद्दों को उठाना,
सच्चे कवि का यही एक धर्म है।

मुहब्बत भरी शायरी से तो,
लुत्फ़ उठाया जाता है,
चुभता सच्चा शब्द लिखा ही,
काम देश के आता है,
इस परंपरा को आगे बढ़ाना,
सच्चे कवि का यही एक धर्म है,
समाज के विशेष मुद्दों को उठाना,
सच्चे कवि का यही एक धर्म है,
समाज के विभिन्न मुद्दों को उठाना,
सच्चे कवि का यही एक धर्म है।

इन नेताओं के ऊपर बोलो

देश को लूटते हैं जो,
होता सब इनकी मर्ज़ी से,
संविधान को मानें क्या वो,
चोर, डाकुओं की धज्जियाँ उड़ाना,
सच्चे कवि का यही एक धर्म है,
समाज के विशेष मुद्दों को उठाना,
सच्चे कवि का यही एक धर्म है,
समाज के विभिन्न मुद्दों को उठाना,
सच्चे कवि का यही एक धर्म है।

बेरोज़गारी, ग़रीबी पर भी,
जड़ो शब्द तलवार सा,
ऐसी कविता लिखो जान,
तख्ता पलटे सरकार का,
गद्दारों को जड़ से मिटाना,
सच्चे कवि का यही एक धर्म है,
समाज के विशेष मुद्दों को उठाना,
सच्चे कवि का यही एक धर्म है,
समाज के विभिन्न मुद्दों को उठाना,
सच्चे कवि का यही एक धर्म है।

हम अल्लाह को नहीं मानते

हम अल्लाह को नहीं मानते,
सिर्फ़ मुर्शीद को हैं जानते,
वही राम , अल्लाह , वाहेगुरु,
उसके ज़रिए तुझको पहचानते,
जैसे आशिक़ बिना माशूक नहीं,
मेरे मुर्शीद के बिना तेरा भी वजूद नहीं।

हम सच्चे दिल से इज़हार करते हैं,
बन्दे हैं तेरे बन्दों से प्यार करते हैं,
जो शक्ल ना दिखाई यशु तूने अपनी कभी,
जा हम तेरी दुनियां को मानने से इनकार करते हैं।

इतना मत इतरा ख़ुदा,
तुझे ढूंढ नहीं सकते,
हम तो वो खोजी हैं,
जो मिल जाने पर दिखाते नहीं,
कि क्या मिला है,
तुझे हमने अभी तक नहीं देखा,
तू सोच क्या पता ये तेरे मन का वहम हो।

जब तक जिव्हा काम करेगी,
तब तक राम – राम करेगी,
जब तक हाथ सलामत मेरे,
रूह उनको प्रणाम करेगी,
जब तक सांसें चल रही हैं,
देह उनका गुणगान करेगी,
आँखें उनका ध्यान करेंगी,
जिव्हा अमृत पान करेगी,
मेरी सोच है जब तक ज़िंदा,
सबका राह आसान करेगी,
जब तक है ईमानदारी,
दिल खोलकर दान करेगी,
मेरे कर्म को याद करके,
दुनियां मुझपर मान करेगी,
जैसे तूने कर्म निभाया,
दुनियां वैसे यशु जान करेगी।

yashu jaan Hindi poems writerयशु जान (9 फरवरी 1994-) एक युवा कवि हैं और वे पंजाबी , हिन्दी , अंग्रेजी भाषाओं में कविताएँ , कहानी , लेख़ , शायरी इत्यादि लिखते हैं | वे जालंधर शहर से हैं। उनका पैतृक गाँव चक साहबू अप्प्रा शहर के पास है। उनके पिता जी का नाम रणजीत राम और माता जसविंदर कौर हैं । उन्हें बचपन से ही कला से प्यार है। उनका शौक गीत, कविता और ग़ज़ल गाना है। वे विभिन्न विषयों पर खोज करना पसंद करते हैं। वे उन रहस्यों को सुलझाने में लगे हुए हैं जिनको अभी तक विज्ञान ने भी नहीं सुलझाया | उनकी बहुत सारीं खोजें चल रही हैं जैसे भूत – प्रेत सच या अंध – विश्वास है ? क्या इस दुनियां के इलावा भी कोई और दुनियां है ? ऐसे बहुत सारे विषयों पर वे खोज कर रहे हैं | उनको इतिहास , धार्मिक ग्रन्थ जैसे चारों वेद , उपनिषद , कुरान जैसी पवित्तर पुस्तकों को पढ़ना बहुत पसंद है | उनका मानना है कि हमारे सारे जीवन की समस्याओं का हल इन्हीं पुस्तकों में लिखा हुआ है | उनकी शायरी के बहुत सारे लोग दीवाने हैं और उनकी शायरी , कविताएँ , ग़ज़लें हिंदी और पंजाबी की अलग – अलग पत्रिकाओं में समय – समय पर प्रकाशित होती रहती हैं

ये भी पढ़े: 👇👇👇

Leave a Comment

2 × 3 =