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आज का युग इतना आधुनिक नहीं है जितना हमारा पौराणिक युग था – Machine Yug in Hindi

कोई हानि ना पहुंचाए,

मशीन वही जो समय बचाये,

रूक कर घाटा ना करवाए,

घड़ी वही जो समय बताये।

Machine Yug: बहुत से विद्वानों ने कहा है कि आज का युग मशीनी युग (Machine Yug) है , गुज़रे ज़माने में तो ऐसा कुछ होता ही नहीं था | मगर मैं कहता हूँ आज का युग उतना मशीनी नहीं है जितना बीता हुआ युग मशीनी था।

मशीनी युग -Machine Yug

महाभारत और रामायण काल के समय इस – इस तरह के भीषण और भयंकर हथयार इस्तेमाल किए गए थे जिनको आज के ज़माने में बना पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है जैसे ब्रह्मास्त्र, नारायणास्त्र, पाशुपतास्त्र और ब्रह्मशिरा अस्त्र जो कि अपने साथ इतनी तबाही लाते थे कि विरोधी सेना का नाश हो जाता था। हमारे वेदों , पुराणों और अनेकों ग्रंथों में इनका वर्णन मिलता है और अब तो विज्ञान भी ये मानने लगा है कि महाभारत का युद्ध हुआ था और उसमें परमाणु बम से भी घातक अस्त्रों का इस्तेमाल किया गया था | आज के युग और पुराने युग में अंतर सिर्फ़ इतना है कि पहले हर व्यक्ति योग, ध्यान के माध्यम से अपना तालमेल कुदरत के साथ बिठाता था और कुदरत को अपने अधीन तक कर लेता था उससे चूक होती थी अपनी शक्तियों का ग़लत इस्तेमाल करने पर | आज किसी के पास इतना समय नहीं है कि वो योग, ध्यान, प्राणायाम आदि कर सके, इसलिए आज का इंसान कुदरती ताकतों से तालमेल बिठाने में असमर्थ है और उसको इस बात का भी ज्ञान नहीं है कि आज के आधुनिक मशीनी युग (Machine Yug) ने उसे कितना निठल्ला बना दिया है।

पहले हर कोई मेहनत करके, तपस्या करके वस्तुओं को प्राप्त करता था चाहे वो दानव था या मानव , मगर आज पैसों के बिना आप कोई वस्तु ख़रीद नहीं सकते | पहले यान हुआ करते थे, पुष्पक विमान हुआ करते थे जिनकी तुलना आज हम हवाई जहाज़ों, हेलीकॉप्टरों से करते हैं, इनका इस्तेमाल करने के लिए हमें एक निर्धारित कीमत चुकानी पड़ती है, तभी हम इनमें सवार हो सकते हैं।

मैं बात करूँ अगर आज के मोबाइल फ़ोन की तो पहले मस्तिष्क की तरंगों से या अपने मन की ध्वनि से एक दुसरे से सम्पर्क किया जाता था जो कि आज भी हमारे बौद्धिक भिक्षु करते हैं पर हम इतना ज़्यादा कष्ट नहीं उठा सकते हमने तो दुकान पे जाना है और एक नया मोबाइल ले लेना है। रामायण और महाभारत के इतिहास को विज्ञान ने आज पूरी तरह स्वीकार कर लिया है और इनके ऊपर बहुत से वैज्ञानिक शोध भी कर रहे हैं। मगर उन्हें दिक्कत इसी बात की हो रही है कि जैसे विस्फ़ोटक हथयार महाभारत और रामायण के युद्ध के समय इस्तेमाल किए गए थे उनको बनाने की का किसी भी ग्रन्थ में वर्णन नहीं है क्यूंकि इनको किसी यन्त्र से नहीं बनाया गया था इनको तो मनुष्य ने कुदरत के साथ तालमेल बिठाकर और ध्वनि को सिद्ध करके यो, तप और गुरु कृपा से बनाया था जो कि आज का विज्ञान नहीं कर सकता क्यूंकि विज्ञान हर प्रश्न का उत्तर ढूढ़ते हुए एक और प्रश्न खड़ा कर देता है जैसे उदाहरण के तौर पर विज्ञान ने ये तो पता लगा लिया कि हमें ज़िंदा रहने के लिए ऑक्सीज़न की ज़रूरत होती है, अब इसके ऊपर एक और सवाल उठता है कि हमें ही ऑक्सीज़न की ज़रुरत क्यों है पेड़ – पौधों को क्यों नहीं और अब इसका जवाब विज्ञान ने दिया है। पेड़ – पौधों को ज़िंदा रहने के लिए कॉर्बन डाईऑक्साइड की ज़रूरत होती है, जो हम छोड़ते हैं जिससे वो अपना खाना बनाते हैं और बदले में हम उनसे ऑक्सीज़न लेते हैं तो अब यहाँ सवाल एक और उठता है, कि जामुन का पेड़ तो रात और दिन दोनों समय ऑक्सीज़न छोड़ता है, ऐसा क्यों है क्या उसे कॉर्बन डाईऑक्साइड की ज़रूरत नहीं है, मेरे कहने का ये मतलब है कि विज्ञान इतना आधुनिक नहीं है जितना आधुनिक पुराण युग था चाहे वो रामायण काल का हो चाहे वो महाभारत काल का हो।

पहले वैध, ऋषि, मुनि व्यक्ति नाड़ी पकड़कर ये बता दिया करते थे कि अमुक व्यक्ति को कौनसा रोग है, और उसका समाधान है, पर आज हम पहले  चिकित्सक के पास जाते हैं फिर वो हमें कुछ निरीक्षण लिखकर देता है जिसकी रिपोर्ट एक दिन या दो दिन या दो घंटे में आ जाती है फिर वो रिपोर्ट का निरीक्षण करता है और फिर आपको दवाई देता है, पर वो आपको ये आश्वासन नहीं देता कि आप इस दवाई से पूरी तरह ठीक हो सकते हो या नहीं। आप ख़ुद सोचिये आज का वैध जो कि अब पढ़ लिखकर  चिकित्सक बन गया है उसको बीमारी का पता लगाने के लिए इतना कुछ करना पड़ रहा है, और जो पौराणिक काल के ऋषि मुनि होते थे जिन्होंने किसी तरह की डिग्री नहीं ली होती थी और जो आपका समय बचाते थे और आपको ये बता भी देते थे कि इतने दिनों के बाद आने की ज़रुरत नहीं है। आप बिलकुल ठीक हो जाओगे और मरीज़ उनके मुख से निकले इन शब्दों को सुनकर ही ठीक हो जाता था। अब आप बताईये कि आज का पढ़ा लिखा चिकित्सक ज़्यादा समझदार है या या हमारे ऋषि – मुनि वैध, मैं यहाँ पर ये नहीं कह रहा कि आज के पढ़े – लिखे चिकित्सक बेकार हैं या बुरे हैं मैं तो सिर्फ़ उदाहरण देकर ये समझने की कर रहा हूँ, कि हमारा आज का युग इतना आधुनिक नहीं है जितना हमारा पौराणिक युग था।

इक्कीसवीं सदी में हम आ भले गए हैं, ग़ौर से सोचना ‘जान’ बहुत पीछे चले गए हैं।

Guest Post by: आपका यशु जान ( प्रसिद्द लेखक और असाधारण माहिर )yashu jaan Hindi poems writer
सम्पर्क : – 9115921994
धन्यवाद।

 

 

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