स्वास्थ्य

मलेरिया के लक्षण व् कारण (मलेरिया कैसे होता है?) Malaria Symptoms and Causes Hindi

पिछले साल पूरी दुनिया में मलेरिया (Malaria) के करीब 21,90,00,000 (21 करोड़ 90 लाख) केस (मरीज) पाए गए थे, उनमें से करीब 4,35,000 लोगों की मलेरिया के कारण मौत हो गई थी। इस तरह मलेरिया की बीमारी एक गंभीर बीमारी और एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या भी मानी जाती है। इस पोस्ट में मलेरिया होने (या फेलने) के कारण और उनके लक्षण दिए गए है।

मलेरिया के कारण (मलेरिया कैसे होता है): Causes of Malaria in Hindi

मलेरिया की बीमारी प्लास्मोडियम नामक परजीवी गण से फैलती है। प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम, प्लास्मोडियम विवैक्स, प्लास्मोडियम ओवेल, प्लास्मोडियम मलेरिये इन 4 प्रकार के परजीवी मनुष्य को प्रभावित करतें है. जिनमे से प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम, प्लास्मोडियम विवैक्स मनुष्य के लिए ज्यादा खतरनाक मानें जाते है. इन चारों परजीवी को “मलेरिया परजीवी” भी कहा जाता है.

ज्यादातर यह परजीवी मच्छरों के माध्यम से फैलते है, मादा एनोफिलेज़ मच्छर मलेरिया के परजीवी का वाहक माना जाता है. जब उन परजीवी से संक्रमित कोई मादा एनोफिलेज़ मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को काटता तब उस मच्छर में मोजूद परजीवी उस व्यक्ति के रक्त में चला जाता है. और कुछ दिनों के बाद उस व्यक्ति में मलेरिया के लक्षण दिखने लगते है. और यदि कोई मलेरिया ग्रस्त रोगी को असंक्रमित मादा एनोफिलेज़ मच्छर द्वारा काटे जाने के बाद वह मच्छर दूसरें स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो उस स्वस्थ व्यक्ति को भी मलेरिया का संक्रमण लग सकता है.

आम तौर पर यह परजीवी मनुष्य के यकृत और लाल रक्त कोशिकाओ में आसरा लेते है. ज्यादातर संक्रमित होने से 6 से 10 दिन बाद मलेरिया के लक्षण मिलने शुरू हो जाते है लेकिन् कई बार उसमे 1 साल तक का भी समय लग सकता है. मच्छर के अलावा संक्रमित रक्त, संक्रमित इंजेक्शन आदि से भी मलेरिया की बीमारी फेल सकती है. मलेरिया की बीमारी ज्यादातर 5 साल से कम उम्र वाले बच्चो और गर्भवती महिलाओ में जल्दी से फेलती है.

मलेरिया के लक्षण: Symptoms of Malaria in Hindi

  • तेज कंपकंपी के साथ ठंड लगना और फिर शरीर का तापमान बढ़कर बुखार आना. 4 से 5 घंटे बाद बुखार उतर जाता है और पसीना आने लगता है.
  • फैल्सीपैरम परजीवी से संक्रमित होने से शुरू में कंपकंपी के साथ ठंड लगती है और फिर बुखार आता है. बुखार 2-3 में के चक्र में बुखार आता है.
  • उलटी-उबकाई होना, थकान व् कमजोरी होना
  • कुछ गंभीर मामलो में यकृत के आकार का बढना, तिल्ली, तेज सरदर्द, रक्त में ग्लूकोज की मात्रा में कमी जेसे लक्षण पाए जाते है.
  • गंभीर मामलो में यूरीन में हीमोग्लोबिन का उत्सर्जन, किडनी विफलता, मरीज का कोमा में चले जाना और कई मामलो में दर्दी की मृत्यु होना भी संभव है.

किसी भी प्रकार के लक्षण पाए जाने पर आपको तुरंत किसी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. किसी डॉक्टर की सलाह लिए बिना कोई कदम नही उठाने चाहिए.

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