जीवन शैली

क्या स्मार्टफोन जेसी नई टेक्नोलॉजी से रिश्तों में कमी आती है? Mobile ke Nuksan

Mobile ke Nuksan: क्या आप जानते हैं कि स्मार्ट फोन के ज्यादा इस्तेमाल से हमारे रिश्तो (relations) पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। हम सब जानते है की नयी नयी टेक्नोलॉजी (जेसे की Smart Phones) की वजह से हमारे रिश्तो में कमी आती दिखाई दे रही है। सही तरीके से जाने तो कई लोग अपने घर के सदस्यों, करीबी रिश्तेदारो, स्वजनों, और मित्रो से दुरी बनाय रखना पसंद करते है। यह रिश्ते (relation) बनाए रखने के लिए हमें इससे थोड़ी सावधानी रखने की जरूरत है। स्मार्ट फोन्स जेसी टेक्नोलॉजी ने युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया है जिसकी वजह से नई पीढ़ी एक-दूसरे के रिश्ते या संबंध को महत्वपूर्ण नही समजते। हम इस सिचुएशन को एक बीमारी भी कह सकते है। जेसे कि कुछ साल पहले तलाक (divorce) लेने वालों की संख्या आज के मुकाबले बहुत कम देखे जाती थी।

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क्या यह नहीं लगता कि स्मार्ट फोन ने हमारे बच्चों को पूरी तरह से अपनी ओर आकर्षित कर लिया है?
उसका एक उदाहरण देखे तो जब कोई नजदीकी मेहमान हमारे घर पर आता है, तब भले ही बच्चा समझने लायक हो फिर भी उसे उस अतिथि के साथ क्या रिश्ता (relation) है वह ज्ञात नहीं रहता यानिकी बच्चा घर पर आये हुए अतिथि को नही पहचान पाता। और उसको मेहमानों में कम और स्मार्ट फ़ोन्स, टीवी, विडियो गेम्स आदि चीजों में ज्यादा दिलचस्पी रहती है।

हम देखते हैं कि कई बार परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे के साथ बैठ कर एक-दूसरे की बात साझा कर रहे होते है उस समय ज्यादातर बच्चे उनका “स्मार्ट खिलौना” (स्मार्ट फोन) के साथ अपना समय व्यर्थ कर रहा होता है। इस तरह की घटना हर व्यक्ति ने देखि होंगी लेकिन कोई ध्यान नहीं देगा। हमारा मानना होता है की यदि बच्चा मोबाइल में सब कुछ जानता हो उसमे हमारा फायदा है और बच्चा स्मार्ट है। दोस्तों, लगभग हर व्यक्ति यह जानता होगा की मोबाइल्स, विडियो गेम्स, इंटरनेट का फालतू या टाइम पास के लिए उपयोग करने में हमारा ही नुकसान है। लेकिन फिर भी लोगों को जेसे की उनकी लत सी लगी है।

Social Media पे अनजान लोगों से रिश्ते बनाने के चक्कर में लोग वास्तविक रिश्तों/संबंधो को नजरअंदाज कर रहे है। कुछ लोग सुबह उठकर अपने परिवारजनों को गुड मोर्निंग कहे न कहे लेकिन अपने “सोसिअल रिश्तेदारों” को गुड मोर्निंग जरुर कहते है। बच्चो को मोहल्ले के दोस्तों के साथ खेलने की बजाई मोबाइल्स, टीवी, गेम्स आदि में ज्यादा रूचि रहती है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस नई टेक्नोलॉजी (Smart Phone) ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है। लेकिन अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो हमारी भारतीय संस्कृति को बदलने में देर नहीं लगेगी। बच्चों को न केवल मानसिक रूप से बल्कि शारीरिक रूप से मजबूत बनाना चाहिए, यदि आप बच्चों को बाहर खेलने की सलाह देते है तो बच्चे का शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से विकास होगा।

इन बातो का ध्यान रखें

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  • हमें अपने रिश्तेदारों परिवारजनों दोस्तों के साथ समय बिताने की आदत डालनी चाहिए और उस बात का ध्यान रखें की अपने बच्चों को अपने रिश्तेदारों संबंधियो की पहचान हो और रिश्तें की अहमियत भी समजानी चाहिए।
  • हमारे बच्चें ज्यादातर हम ही से सबकुछ सीखते है, इस लिए बच्चो के सामने मोबाइल का कम इस्तमाल करें।
  • अगर बच्चे को स्मार्ट फोन की सब चीजें सिख ले तो यह नहीं समझना की बच्चा स्मार्ट है, बाहरी दुनिया और संबंधों के बारे में जानना भी आवश्यक है और अगर बच्चा बाहर के शारीरिक खेल खेलता है, तो यह शारीरिक रूप से भी मजबूत हो जाएगा।
  • यदि समूह में बैठा कोई व्यक्ति मोबाइल का ज्यादा उपयोग कर रहा हो, तो इसे मोबाइल का उपयोग न करने की सलाह देनी चाहिए।
  • अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में शायद आपका परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों आदि में ज्यादा रूचि नही रहेगी और आप इस बात को अच्छी तरह समझ सकते हैं।
  • सिर्फ बच्चों को ही नहीं बड़ों को भी यह बात समजनी चाहिए की टीवी, मोबाइल्स, सोशल मिडिया आदि के बजाई परिवारजनों, रिश्तेदारों, दोस्तों के लिए समय निकालें।
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