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हिंदी कविता | New Hindi Poems | Hindi Kavita 2019 – यशु जान

New Hindi Poems: यशु जान (9 फरवरी 1994-) एक पंजाबी कवि और अंतर्राष्ट्रीय लेखक हैं। वे जालंधर शहर से हैं। उनका पैतृक गाँव चक साहबू अप्प्रा शहर के पास है। उनके पिता जी का नाम रणजीत राम और माता जसविंदर कौर हैं । उन्हें बचपन से ही कला से प्यार है। उनका शौक गीत, कविता और ग़ज़ल गाना है। वे विभिन्न विषयों पर खोज करना पसंद करते हैं। उनकी कविताएं और रचनाएं बहुत रोचक और अलग होती हैं। उनकी अधिकतर रचनाएं पंजाबी और हिंदी में हैं और पंजाबी और हिंदी की अंतर्राष्ट्रीय वेबसाइट पे हैं |उनकी एक पुस्तक उत्तम ग़ज़लें और कविताएं के नाम से प्रकाशित हो चुकी है। आप जे . आर . डी . एम् . नामक कंपनी में बतौर स्टेट हैड काम कर रहे हैं और एक असाधारण विशेषज्ञ हैं। उनको अलग बनाता है उनका अजीब शौंक जो है भूत-प्रेत से संबंदित खोजें करना,लोगों को भूत-प्रेतों से बचाना,अदृश्य शक्तियों को खोजना और भी बहुत कुछ। उन्होंने ऐसी ज्ञान साखियों को कविता में पिरोया है जिनके बारे में कभी किसी लेखक ने नहीं सोचा,सूफ़ी फ़क़ीर बाबा शेख़ फ़रीद ( गंजशकर ), राजा जनक,इन महात्माओं के ऊपर उन्होंने कविताएं लिखी हैं। उनके नाम इतनी काम उम्र में अभी तक 200 कविताएँ पंजाबी में और 110 कविताएँ हिन्दी में और 20 कविताएँ अंग्रेजी में हैं।

हिंदी कविता – New Hindi Poems – Hindi Kavita

हम आपके लिए खास एक पंजाबी कवि यशु जान द्वारा लिखी गई कविताएँ लायें है। जिसमे मोटिवेशनल कविता, दर्द भरी कविताएँ (Sad Love Poems), जीवन से जुडी कविताएँ (hindi poems on life), इमोशनल कविताएं, रोमांटिक कविता (Love Poems Hindi), Short Hindi Poems For Class हिन्दी कविता बच्चों के लिए (Poems in Hindi For Kids), Hindi Poem Lyrics, प्रसिद्ध हिंदी कविताएँ है।

बड़ी देर के बाद

कोई क्या कहेगा कोई क्या नहीं,
ज़माने की परवाह हम छोड़ चुके हैं बरसों से

क्या मन तेरा अब भर गया,
ज़माने की वाह वाही से,
जो ख़त लिख लिख कर भेज रहे,
अपनी खून स्याही से

बड़ी देर के बाद,
मुझे तेरा पैगाम मिला,
पहले पन्ने पर उसके,
लिखा हुआ तेरा नाम मिला,
बड़ी देर के बाद

अगले पन्ने पर लिखा हुआ था,
तेरी याद बड़ी मुझे आती है,
उसके नीचे ही लिखा था तूने,
तस्वीर तेरी रुलाती है,

वो समय दोबारा ना आया,
जब होंठ तेरे का जाम मिला,
बड़े दिनों के बाद

आखिरी पन्ना भर रखा था,
अपने ही आँसू लिख लिख कर,
मेरी आँख भी थी फ़िर रोने लगी,
ज़मीन के ऊपर लिट लिट कर,
आखिरी लफ़्ज़ों में प्यार लिखा यशु,
जिनसे मुझको आराम मिला,
बड़े दिनों के बाद।

क़तल – New Hindi Poems

मेरे क़तल का इल्ज़ाम तुझपर है ,
सिर्फ़ सबूतों को इकठ्ठा करने दे

तुझे सज़ा मिलेगी मौत से बत्तर ,
कोई पुख़्ता सबूत हाथ लगने दे

तेरे इल्म का तोड़ हाथ लग गया मेरे ,
सिर्फ़ आजमाने का तरीका पढ़ने दे ,

जान बस में है तेरी मेरे ये जान ले तू ,
ख़ुद कहेगा माफ़ कर मुझको मरने दे।

कविता आपको हिला देगी

पूरे जहान में छोर मचा देगी ,
मेरी ये कविता आपको हिला देगी ,
कुछ सवाल करूँगा ,
जवाब भी दूंगा ,
लिख़ने से पीछे ना हटूंगा ,
सारी बात समझा देगी ,
मेरी ये कविता

परीक्षा लेती है जो हमारी ,
कौनसी चीज़ है सबसे भारी ,
नेता लोग हैं उसे उठाते ,
थोड़े दिनों में भूल भी जाते ,
जो अपने घर में उनको प्यारी ,
ऐसी चीज़ है ज़िम्मेदारी ,
तोल सकें ना फिर भी भारी ,
बड़ी है भारी ज़िम्मेदारी ,
देखना उलझनों में फसा देगी ,
मेरी ये कविता

जिसके पास गुणों की खान ,
मुट्ठी में कर लेता जान ,
मन माला की फेरे तस्वी ,
ख़ुदा से ऊंची उसकी पदवी ,
जिसका कोई ना अंत-शुरू ,
उसको बोलते पूर्ण गुरु ,
वही बताए नर्क – पुरु ,
ऐसे होते हैं पूर्ण गुरु ,
उलझी गुत्थी को सुलझा देगी ,
मेरी ये कविता

होते हुए भी जो ना है ,
छूते हैं फिर भी है क्षय ,
प्राणी सिर्फ़ है दुःख ही पाता ,
और किसी का कुछ ना जाता ,
ख़ुदा ने हमें बनाकर खेला ,
कहते हैं जिसे दुनिया का मेला ,
कठपुतली हम यशु वो अकेला ,
कैसा है ये जगत झमेला ,
कर कुछ ना कुछ ग़ुनाह देगी ,
मेरी ये कविता आपको हिला देगी ,

मेरी ये कविता।

मेरा मरना अभी तय नहीं हुआ

छोड़ दो मेरे भाईयों को लड़वाना ,
हिन्दू, मुस्लिम कहकर बरगलाना ,
मैं बीच में खड़ा हूँ बात मुझसे करो ,
मैं डरने वाली शह नहीं हुआ ,
जो तुम मुझे धमकियाँ दे रहे हो ,
मेरा मरना अभी तय नहीं हुआ

सोचो जब हम उतरेंगे मैदान में ,
बदल देंगे मैदान को श्मशान में ,
तुम बाँट रहे इंसानियत को जो ,
धर्मों और पाखंड की दुकान में ,
अपनी बात पे अड़ा हूँ बात मुझसे करो ,
डरपोक बुजदिल अभी मैं नहीं हुआ ,
जो तुम मुझे धमकियाँ दे रहे हो ,
मेरा मरना अभी तय नहीं हुआ

राजनीति हमारे लिए श्राप है,
यहाँ जो भी माँगता इन्साफ़ है,
उसको ईन दरिंदों की टोली,

कूड़े की तरह कर देती साफ़ है,
मैं खतरनाक बड़ा हूँ बात मुझसे करो,
जिन्हें किसी से भी भय नहीं हुआ,
जो तुम मुझे धमकियाँ दे रहे हो,
मेरा मरना अभी तय नहीं हुआ

छोर मचाओगे तो सोये जाग उठेंगे,
फ़िर तुम जैसे डरकर भाग उठेंगे,
तुम देखना हम समंदरों से भी,
लेकर तबाही वाली आग उठेंगे,
मै ना बेहोश पड़ा हूँ बात मुझसे करो,
यशु जान का इरादा अभी ढह नहीं हुआ,
जो तुम मुझे धमकियाँ दे रहे हो,
मेरा मरना अभी तय नहीं हुआ।

हुस्न वालों की शिकायत

कोई शिकायत करो इन हुस्न वालों की,
वरना आशिकों के जनाज़े निकलते रहेंगे

इनका मासूम चेहरा देखकर कोई कुछ ना कहेगा ,
पत्थरों को दिल लगेंगे और पिघलते रहेंगे

उम्मीदों पर पानी फिरेगा आशिकों की खुवाहिशें मरेंगी ,
ना चाहकर भी वो चोट खाते रहेंगे इनसे मिलते रहेंगे

ज़ुल्म जितना मर्ज़ी करें यशु जान ये हुस्न वाले ,
आशिकों की कबर पे मुहब्बत के फूल खिलते रहेंगे।

सिर झुक गया

मेरा सिर झुक गया शर्म से ,
देखकर भूख से तड़पता इंसान को ,
ज़ुबान बाहर आ गई मेरे हलक से ,
ग़रीबी के हालात में देख निकलती जान को

सरकार कहती है खज़ाना ख़ाली है ,
ये कहना जनता के मुँह पे गाली है ,
मैंने तो हर चीज़ पे कर चुकाया है ,
साबुन , तेल या मेरी कमाई माया है ,
फिर भी खज़ाना इनका ख़ाली पाया है ,
कैसी समस्या घेरे है हिंदुस्तान को ,
मेरा सिर झुक गया शर्म से

सरकारी तनख़्वाह समय पर आती ,
मज़दूर की मज़दूरी घटती ही जाती ,
क्या बताऊं मिट्टी में मिल गई जवानी ,
सरकारें कर रही हैं अपनी मनमानी ,
जनता को मूर्ख समझे जनता है ज्ञानी ,
भूल गए आज़ादी के उस वरदान को ,

मेरा सिर झुक गया शर्म से,

फ़िल्मी सितारे करोड़ों में कमाते भाई ,
हवाई जहाज़ों में घूमें इतनी है कमाई ,
वो बच्चा भला किसे सुनाए अपना दुखड़ा ,
चुराता पकड़ा जाये जो रोटी का टुकड़ा ,
देखने वाला होता है उसका मासूम मुखड़ा ,
कोई तो हल बता मौला यशु जान को ,
मेरा सिर झुक गया शर्म से।

Guest Post by: आपका यशु जान ( प्रसिद्द लेखक और असाधारण माहिर ) yashu jaan Hindi poems writer
सम्पर्क : – 9115921994
धन्यवाद।

 

 

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