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प्रभु यीशु मसीह शायरी और कविताएँ | Yeshu Masih (Jesus) Shayari And Poems

यीशु मसीह के ऊपर शायरी  – Yeshu Masih (Jesus) Shayari

मुझे धक्का दिया किसी ने ऊंची पहाड़ी से,
कुचलना भी चाहा था रेलगाड़ी से,
यशु को डर नहीं था चाहे था पीछे शैतान पड़ा,
मुझे मुश्किल जब आई मैंने साथ पाया है ‘यीशु’ को खड़ा।

उसने एहसान किया है मुझे अपने आसपास रखकर,
मुझे बचाया है मरने से हमेशा मेरी लाज रखकर,
मैं क्या बताऊं यशु जान ‘यीशु’ ने मुझे क्या – क्या दिया,
शुक्र है उसका आशीर्वाद दिया है मेरे सिर पे हाथ रखकर।

प्रभु मेरा मरों में से उठ आया था,
वैसे ही वो तुझे जगाएगा,
तेरे शरीर के दुःख – दर्द को,
छूहकर वो मार मिटाएगा,
इतनी शक्ति परमेश्वर तुझे देगा यशु,
तेरा कोई कुछ बिगाड़ ना पाएगा।

देख प्रभु तेरे सामने खड़ा है,
देख तेरी आंख में कंकर गड़ा है,
इस लिए तुझे प्रभु दिख नहीं रहा,
पर तू तो प्रभु के चरणों में पड़ा है,
तू महसूस कर परमत्मा तुझे छूह रहा है,
तेरा शरीर दुःख – दर्द , बीमारियों से भरा है,
‘यीशु’ के आगे जो तूने सच्चे मन से फैला हाथ दिए,
तो समझ जा प्रभु ने तेरे सारे पाप माफ़ किए।

Yeshu Masih Shayari And Poems

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यीशु मसीह के ऊपर कविताएँ  – Yeshu Masih (Jesus) Poem

यीशु तेरा प्यार

अच्छा करो अपने बंदों को,
चलादो ‘यीशु’ काम धंदो को,
बुद्धि बख़्शो पापियों को,
देना सब कुछ मेरे साथियों को,
हमें देख तू ले एक बार,
हम चाहें यीशु तेरा प्यार।

अंधों को आँखें तूने ही दी हैं,
मेरी मुश्किलें भी हल तूने की हैं,
मैं इस जग में था जब भी अकेला,
तूने लगाया था जीवन में मेला,
मेरी होने ना दी तूने हार,
हम चाहें यीशु तेरा प्यार।

सुन ना पाते थे जो तेरी महिमा,
उनको दी सुनने की ताकत तूने,
सागर में जब नाओ डूबने लगी थी,
रोकी इशारों से आफ़त तूने,
मेरा तू ही है सच्चा यार,
हम चाहें यीशु तेरा प्यार।

करदो बीमारी दूर उन सबकी,
कई सालों से जो तड़प रहे हैं,
यशु जान से ‘यीशु’ और लिखाओ,
हम गीत सुनने को तरस रहे हैं,
ऐसा है हमारा किरदार,
हम चाहें यीशु तेरा प्यार।

यीशु आया सपने में

कल यीशु आया सपने में,
जिसमें मैं था,
मेरा सखा था,
उसने मेरे कंधे पर,
अपना हाथ रखा था,
क्योंकि वो देख नहीं सकता था,
हैरानी की बात थी ये,
उसने ही बोला था मुझे,
कि एक प्रकाश सा सामने आया है,
जिसने मुझे ‘यीशु’ का चेहरा दिखाया है।

प्रभु ने कहा फ़िर बुलाकर,
मेरे भी नज़दीक आकर,
बोले मुझे देखने के लिए,
कोई रौशनी ना चाहिए दीये,
मैं सच्चा हूँ सच ही बतलाता हूँ,
हो आत्मा जिसकी पवित्तर उसे,
बिन आँखों के दिख जाता हूँ।

सब समान हैं मेरे लिए,
मैंने बहुत सोचा बंदे तेरे लिए,
पाप मत कर पाप का नाश कर,
वर्ना व्यर्थ है पल ज़िन्दगी के जीये,
‘यशु’ प्रार्थना सच्ची में शक्ति होती,
मौत को भी जो दिखा दे,
मौत की मौत होती ,
आगे बढ़ सामना कर ,
तेरे आसपास हूँ मैं ,
तेरी सांसों की सांस हूँ मैं।

yashu jaan Hindi poems writerयशु जान (9 फरवरी 1994-) एक युवा कवि हैं और वे पंजाबी , हिन्दी , अंग्रेजी भाषाओं में कविताएँ , कहानी , लेख़ , शायरी इत्यादि लिखते हैं | वे जालंधर शहर से हैं। उनका पैतृक गाँव चक साहबू अप्प्रा शहर के पास है। उनके पिता जी का नाम रणजीत राम और माता जसविंदर कौर हैं । उन्हें बचपन से ही कला से प्यार है। उनका शौक गीत, कविता और ग़ज़ल गाना है। वे विभिन्न विषयों पर खोज करना पसंद करते हैं। वे उन रहस्यों को सुलझाने में लगे हुए हैं जिनको अभी तक विज्ञान ने भी नहीं सुलझाया | उनकी बहुत सारीं खोजें चल रही हैं जैसे भूत – प्रेत सच या अंध – विश्वास है ? क्या इस दुनियां के इलावा भी कोई और दुनियां है ? ऐसे बहुत सारे विषयों पर वे खोज कर रहे हैं | उनको इतिहास , धार्मिक ग्रन्थ जैसे चारों वेद , उपनिषद , कुरान जैसी पवित्तर पुस्तकों को पढ़ना बहुत पसंद है | उनका मानना है कि हमारे सारे जीवन की समस्याओं का हल इन्हीं पुस्तकों में लिखा हुआ है | उनकी शायरी के बहुत सारे लोग दीवाने हैं और उनकी शायरी , कविताएँ , ग़ज़लें हिंदी और पंजाबी की अलग – अलग पत्रिकाओं में समय – समय पर प्रकाशित होती रहती हैं

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